अमरीका के इस भयानक अपराध में विमान पर सवार सभी 290 लोग शहीद हो गये थे। इन लोगों में 66 बच्चे, 53महिलाएं और 46 विदेशी नागरिक थे। इस विमान में ईरानी नागरिकों के अलावा, 20 भारतीय, एक इतालवी, 6 पाकिस्तानी, 13 यूएई नागरिक और युगोस्लाविया के 6 लोग यात्रियों में शामिल थे।
3 जूलाई सन 1988 को दस बजकर पांच मिनट पर ईरान एयर का एयर बस विमान 290 यात्रियों के साथ बंदर अब्बास से दुबई के लिए उड़ा लेकिन 12 हज़ार फुट की ऊंचाई पर पहुंचते ही ठीक दस बजकर बाइस मिनट पर अमरीकी युद्धपोत विन्सन्स के कप्तान, वेल राजर्स के आदेश पर मार गिराया गया और यह यात्री विमान अचानक ही राडार से गायब हो गया।
बंदरअब्बास हवाई अड्डे के कंट्रोल टावर ने दुबई से संपर्क किया और उड़ान संख्या 655 के बारे में पूछताछ की किंतु दुबई के कंट्रोल टावर ने भी अनभिज्ञता प्रकट की। ईरान ने हुरमुज़गान राज्य में अपात स्थिति की घोषणा की और कई हेलीकाप्टर और स्पीट बोट, घटनास्थल की ओर रवाना किये गये।
सैयद हुसैन हाशमी उन गिने चुने फोटोग्राफरों में शामिल हैं जिन्हें सेना के साथ ही घटनास्थल पर जाने का अवसर मिला। वहां उन्होंने इस कड़वी घटना को कैमरे में क़ैद किया किंतु उनके खींचे गये बहुत से फोटो आज तक प्रकाशित नहीं किये गये। वह बताते हैः " वह रविवार का दिन था, मैं कैहान समाचार पत्र के कार्यालय में था कि अचानक ही खबर आयी कि फार्स की खाड़ी में ईरान एयर का एक यात्री विमान लापता हो गया है। उसके बाद के हालात, बड़ी बेचैनी से गुज़रे यहां तक कि साढ़े ग्यारह बजे खबर की पुष्टि हो गयी और यह बताया गया कि ईरान एयर के एक यात्री विमान को, बंदरअब्बास से दुबई जाते समय, अमरीकी युद्धपोत ने मार गिराया है। "
वह बताते हैं कि मुझे घटनास्थल पर जाने का आदेश मिला, मैंने जल्दी जल्दी अपना कैमरा लिया और तत्काल मुझे एयरपोर्ट पहुंचा दिया गया जहां मैंने साढ़े बारह बजे एक प्राइवेट जेट विमान से उड़ान भरी और बंदर अब्बास पहुंचा जहां हमारे इंतेज़ार में गाड़ियां खड़ी थीं। हम सब को प्रधानमंत्री के कार्क प्राइवेट जेट विमान से उड़ान भरी और बंदर अब्बास पहुयालय से आने वाले एक अधिकारी ने नौसेना के अड्डे पर पहुंचाया जहां हम एक हावरक्राफ्ट द्वारा घटनास्थल की तरफ रवाना हो गये।"
वह बताते हैं कि इस घटना का समाचार नेशनल टीवी पर दो बजे प्रसारित हुआ और तीन बजे से पहले ही मैं घटना स्थल पर पहुंच गया। लगभग आठ बजे रात तक कई अन्य पत्रकार भी बंदरअब्बास पहुंच चुके थे। हमने देखा कि लाशों को पानी से निकालने के लिए एक जहाज़ घटना स्थल जा रहा है मैंने दोबारा वहां जाने का आग्रह किया तो हम तीन लोगों को उसी जहाज़ पर सवार होने की अनुमति मिल गयी। बड़ा ही दिल दहला देने वाला दृश्य था। चारो ओर लाशें ही लाशें थीं। मछुआरे और गोताखोर लाशे लाकर हमारे जहाज़ पर रख रहे थे। हम जब लाशें लेकर तट पर पहुंचे तो बंदर अब्बास नगर, पत्रकारों से भर चुका था और लोग अपने अपने परिजनों के लिए बंदर अब्बास पहुंच चुके थे। मैं साथियों से अलग हो गया और अकेला ही " हेंगाम द्वीप " पहुंचा जहां सब से अधिक शव पानी पर तैर रहे थे। मछुआरों ने शवों को रस्सी की मदद से नौकाओं से बांध रखा था। धमाके और हवा के दबाव की वजह से अधिकांश शव बिना कपड़े के थे और क्षत विक्षत हो चुके थे। वहां फोटो खींचने के बाद मैं ने एक नौका किराये पर ली और फार्स की खाड़ी में उस स्थान पर फिर गया जहां विमान गिरा था। "
वह बताते हैं कि " मैं एक फोटोग्राफर था, अपना काम कर रहा था मगर उसके साथ ही मैं एक इन्सान भी था यही वजह थी कि मेरी आंखों से आंसू गिर रहे थे और उंगलियां कैमरे का बटन दबा रही थीं। पानी पर कहीं सिर ही सिर तैरते दिखायी दे रहे थे, कहीं हाथ और कहीं केवल पैर और कहीं सिर्फ धड़ तैर रहे थे। 290 लाशों और उनके अवशेषों की खोज में 52 दिन लगे। इस अभियान के दौरान क्षेत्र में तापतान 50 डिग्री था जिसकी वजह से अभियान में बड़ी कठिनाई आ रही थी। मैं एक हफ्ते तक वहां रहा और सैंकड़ों फोटो खींचे मगर मेरे खींचे हुए सभी फोटो सुरक्षा कारणों की वजह से प्रकाशित नहीं हुए।"
यह फोटो अगर आज भी प्रकाशित कर दिये जांए तो सब को पता चल जाएगा कि अमरीका किस सीमा तक क्रूर है और मानवाधिकारों में कैसा विश्वास रखता है। अमरीका ने इस यात्री विमान को मार गिराने वाले अपने सैन्य अधिकारी को पदक से भी नवाज़ा उसके बाद अमरीकी राष्ट्रपति ट्रम्प यह कहते हैं कि वह 150 लोगों की मौत का सोच कर ईरान पर हमले के फैसले को बदलने पर मजबूर हो गये!